समाज का इतिहास
हमारे अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण
श्री राँका-बॉका के सम्बन्ध में विवरण
श्री गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित “भक्त सुमन” (भक्त चरित्र माला १३ वां पुष्प) जो प्रसिद्ध लेखक श्री हनुमान प्रसाद पोहार द्वारा सम्पादित है उसमें श्री राँका-बॉका के सम्बन्ध में छपा विवरण सही माना जाए तो इस निष्कर्ष पर पहचते है कि:
- श्री राँका जी ने ऋगवेदी महाराष्ट्र ब्राह्मण के घर जन्म लिया था और श्रीमती बॉका जी भी जन्म से ब्राह्मण थी।
- श्री रांका-बांका ने सादगी में सच्चे परिश्रमी होकर संसार की धन लोलुपता से दूर रह कर एक महान् चारित्रिक गृहस्थ जीवन व्यतीत किया और प्रभू भक्ति में समर्पित रहे।
- श्री राँका बाँका के अनुयायियों से बना “राँकावत समाज" केवल एक जाति नहीं है अपितु श्री रकाबांका के सिद्धान्तों में आास्था रखने वाले हर जाति के लोग रांकावत समाज के अंग है।
– शंकरलाल, अध्यक्ष
श्री रकण भवन रकावत संस्था, रानी स्टेशन, जिला-पाली राजस्थान
चौरासी धूणी तपस्वी महात्मा श्रीमती जमनादासजी
जन्म गाँव-खौड़ पिता श्री किशनदासजी, स्थान एवं समाधी स्थल: वृन्दावन कालीदेह नृसिह टेकरी, उत्तर प्रदेश
संस्था के संस्थापक एवं प्रेरणास्त्रोत
स्वर्गीय श्री सोहनदासजी पुत्र श्री हिम्मतरामजी वैष्णव, गांव-खौड़ (अध्यक्ष श्री शंकरलाल के पिताश्री)
सस्था के अध्यक्ष श्री शंकरलालजी
के साथ समारोह के स्वागताध्यक्ष श्री मांगी लालजी (लुधियाने वाले ) और युवा मन्त्री श्री वाबूलालजी शर्मा। पीछे खडे है- कार्यकारिणी के सदस्य श्री वाबूलालजी पुत्र श्री तोलारामजी। (गत रकरण जयन्ती के अवसर पर लिया गया चित्र)
श्री चम्पालालजी (धरणावाले)
द्वारा, थी रकण भवन संस्था रानी के प्रति उनकी सेवाओं के लिए संस्था के अध्यक्ष श्री शंकरलालजी ने उनका साफा बांधकर सम्मान किया। (गत रंकण जयन्ती के अवसर पर लिया गया चित्र)